Wednesday, July 28, 2010

सेवा सबसे महान कार्य

धर्म मार्ग का सबसे महत्वपूर्ण सूत्र है - सेवा
मनीषियों ने सेवा को कठोर तप कहा है / उनका मानना है की सेवा योगियों के लिए भी अगम्य है / कारण स्पष्ट है - सेवा में कर्त्तव्य का अभिमान नहीं होता / जिसमे अहं का भाव होता है, वह कभी सेवक नहीं बन सकता / हनुमान जी सेवक भाव की प्रतिमूर्ति है / भगवन श्री राम के बिना उनका कोई अस्तित्व नहीं है /
सेवा करने वाले सेवक की अपनी कोई इच्छा नहीं होती / वह तो यंत्रवत कार्य करता है / ऐसा कर पाना बहुत कठिन है तभी तो सेवा को योगियों द्वारा अगम्य माना गया है /
सेवा करने के लिए आप अपने परिवार में सेवक बनकर देखिये / आप स्वयं तो प्रसन्नता के समुद्र में हिलोरे लेंगे ही, आपका समूचा वातावरण भी खुशियों में नहा उठेगा /
आज के मशीनी युग में सेवा और देशप्रेम का भाव क्षीण होता जा रहा है / मै अपने युवा साथियों से निवेदन करता हूँ की सेवा, संघर्ष और बलिदान का नारा जो की हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जी द्वारा दिया गया है, उसे सार्थकता प्रदान करने में अपनी भूमिका का निर्वहन करे /
आपका
जीतू जिराती

Thursday, July 22, 2010

Forgiveness is the attribute of the strong.

Dear Fellow Citizens,

I have received the love and affection of a brother and a son
from this family called Indore. The expression of this feeling
of gratitude is beyond words.

BJYM Rally was organized on account of the love, affection
and enthusiasm of our young members.Having received such
a crucial profile, it becomes a moral responsibility to ensure
the continuous and ever growing morale of the party personnel.

As a responsible public representative and a member of
a disciplined party, the comfort and convenience of
fellow citizen is of prime importance to me. Hence during
the entire path of the rally, we tried to ensure a smooth traffic
movement as well as high level of discipline and decency display
by our personnel in the best interest of commercial establishments
and residents.

Inspite of our best efforts, if our conduct has directly
or indirectly, resulted in an inconvenience for anybody,
we regret and apologize for the same.

Jitu Jirati
State President - BJYM (MP)
Member of Legislative Assembly - Rau (Indore)

क्षमा अग्रजस्य भूषणं

आदरणीय प्रबुध्जनो, नागरिक बंधुओ ,
सादर प्रणाम,
माँ अहिल्या की पावन परिवार रूपी नगरी के हम सभी सदस्य है, आपने अपने परिवार सदस्य को बेटे और भाई के रूप में जो प्यार और आशीर्वाद दिया है उसके आगे धन्यवाद् शब्द बहुत छोटा है /
भाजयुमो की रैली युवा कार्यकर्ताओ के स्नेह और उत्साह के परिणाम स्वरुप आयोजित की गयी थी, संगठन के किसी दायित्व प्राप्त करने पर आपको साथी कार्यकर्ताओ के मनोबल और उत्साहवर्धन के कार्य भी करने होते है /
एक अनुशासित पार्टी का कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि होने के नाते आपकी सुविधाओ का ध्यान रखना मेरा परम कर्तव्य है, इसी सन्दर्भ में हमने रैली मार्ग में सुचारू यातायात व् हमारे व्यापारी और नागरिक बंधुओ के हितो को ध्यान में रखते हुए अनुशासन व् मर्यादा का पूरा ध्यान रखा /
इसके उपरांत भी यदि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी को भी इस आयोजन के कारण कोई असुविधा हुई है तो मुझे इसके लिए खेद है और में आपसे ह्रदय से क्षमाप्रार्थी हूँ /
जीतू जिराती
प्रदेशाध्यक्ष भाजयुमो
विधायक राऊ

Friday, July 16, 2010

Thanks A Lot....

Dear All,

I take this opportunity to thank all my seniors, colleagues and friends for their invaluable support that they have extend to ensure my appointment as the State President of Bhartiya Janta Yuwa Morch.

Together we can and we will make the difference.

Looking forward to your continued support and cooperation as always.

Jitu Jirati

Thursday, July 15, 2010

धन्यवाद्

धन्यवाद् देना बेमानी लगता है / भारतीय जनता पार्टी एक ऐसा विचार प्रवाह है, जिसे छूता है वह बहने लगता है / मालवी में एक कहावत है " पावना भेले पई, ने राम करे सो सई" / यदि मुझ पर विश्वास किया है तो में भी विश्वास दिलाता हूँ की युवा शक्ति को जिस दिशा में ले जाने का स्वप्न हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व ने देखा है, उसकी परिणिति के लिए जी जान लगा दूंगा /
मै ह्रदय से आभारी हूँ हमारे राष्ट्रीय व प्रादेशिक नेतृत्व का जिन्होंने मुझ पर विश्वास करके प्रदेश के युवाओ की जिम्मेदारी मुझ पर सौपी है और साथ ही साथ मेरे सभी युवा मित्रो से निवेदन करता हूँ की मेरे साथ कंधे से कन्धा मिला कर हमें हमारे आदरणीय मुख्यमंत्री जी के स्वर्णिम मध्यप्रदेश के स्वप्न को साकार करना है / तो आइये हम सभी संकल्प लेते है की आज से ही समृद्ध एवं विकसित मध्यप्रदेश के स्वप्न को साकार करने के लिए कमर कस ले /

जीतू जिराती

Tuesday, July 13, 2010

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन गडकरी जी द्वारा जारी वक्तव्य

पैट्रोल, डीज़ल और एलपीजी की कीमतें बढ़ने से आम आदमी परेशान है और देश की जनता में इस कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के इस जन-विरोधी निर्णय के प्रति जबरदस्त आक्रोश है। महंगाई के खिलाफ आम जनता में जागरूकता पैदा करने व केन्द्र सरकार को बढ़े हुए पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कमी करने के उद्देश्य से देशभर में भाजपा सड़कों पर उतरी है। भाजपा सड़क से लेकर संसद तक इसका विरोध करेगी। भाजपा ने गत 25 जून से ही विरोध कार्यक्रम की शुरूआत कर दी है। देशभर के 428 जिला मुख्यालयों में धरने-प्रदर्शन के कार्यक्रम आयोजित हुए जिसमें 5 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इसी क्रम में 30 जून, 1 जुलाई व 2 जुलाई को देशव्यापी ''भाजपा महंगाई विरोधी जन आंदोलन'' कार्यक्रम आयोजित हुआ। देशभर के भाजपा कार्यकर्ताओं ने रैली, धरना प्रदर्शन व गिरफ्तारी देकर अपना जबरदस्त विरोध जताया है। यह विरोध कार्यक्रम आगे भी जारी रहेगा और इस कड़ी में 5 जुलाई को भारत बंद का आयोजन किया गया है। भाजपा का मंहगाई के विरूध्द एक हस्ताक्षर अभियान देशभर में चल रहा है। मानसून सत्र के पहले दिन भारतीय जनता पार्टी 10 करोड़ लोगों का मंहगाई विरोधी हस्ताक्षरित ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति को सौंपेंगी।
 
कांग्रेस नीत यूपीए सरकार की गलत आर्थिक नीति, कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के कारण आम जनता की बुनियादी जरूरतों की वस्तुओं की कीमतों में बेतहाशा वृध्दि हो रही है। आम जनता महंगाई की मार से बेहाल हो चुकी है। यूपीए सरकार की जन-विरोधी नीतियों के कारण देश में एक आतंक का माहौल दिखाई देने लगा है। देश के अंदर पिछले साल और इस साल गेहूं का रिकार्ड उत्पादन हुआ है। सरकारी आंकड़ों द्वारा चीनी का उत्पादन 1 लाख 78 टन के करीब हुआ है। कांग्रेस राज में गरीब भूखा मर रहा है, किसान आत्महत्या कर रहें है और 58 हजार करोड़ का गेहूं एफसीआई गोदामों में सड़ रहा है। अन्य देशों की तुलना में भारत में चीनी की कीमतें  दुगनी है। आज विश्व बाजार की तुलना में भारत में खाद्य पदार्थों की कीमतें 80 प्रतिशत से अधिक हैं। यह सरकार का कुप्रबंधन नहीं तो और क्या है ? दिसम्बर, 2009 में कृषि उत्पादन दर 0.2 प्रतिशत रही है उसके बावजूद भी सरकार ने कृषि विकास के लिए अपने कुल 12 लाख करोड़ के बजट में से मामूली-सा मात्र 0.07 प्रतिशत यानि सिर्फ 900 करोड़ का प्रावधान किया। किसान जब अपनी फसल पैदा करता है तो उसको उसकी कीमत कम मिलती है, दूसरी तरफ ग्राहक के रूप में वही वस्तु खरीदने जाता है तो उससे अधिक कीमत वसूली जाती है। आम जनता में इस सरकार की तानाशाही रवैये के प्रति घोर निराशा है। उसे समझ नहीं आ रहा कि आम जनता के साथ कांग्रेस का हाथ का नारा देने वाली यह सरकार आम जनता से और कितना विश्वासघात करेगी ?
 
कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में यह वायदा किया था कि महज सौ दिन में ही हम महंगाई कम कर देंगे। वह महंगाई, जिसकी मार आम जनता यूपीए-I के शासनकाल के अंतिम वर्षों में झेल रही थी। यूपीए-II के शासन के सौ दिन पूरे हुए और महंगाई कम होने की बजाय कई गुना बढ़ गई। एक वर्ष पूरे होने के पश्चात् भी महंगाई की रफ्तार घटने के बजाय बढ़ती ही चली गई। गत अप्रैल माह में हमने इस सरकार से बढ़ती हुई महंगाई को लेकर 14 महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे थे। तथा इस सरकार से महंगाई के संदर्भ में श्वेत पत्र जारी करने की मांग भी की थी। किंतु, इस कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने आम जनता के हितों से जुड़े इन प्रश्नों की अनदेखी करते हुए महंगाई को कम करने का कोई भी प्रयास नहीं किया।
 
इस बढ़ती हुई महंगाई ने देश की गरीब और मध्यम वर्ग की जनता की कमर तोड़ दी है। सरकार को यह भी नहीं पता कि इस देश में कितने गरीब है। योजना आयोग के अनुसार यह संख्या 27 प्रतिशत है। ग्रामीण विकास की एन.सी. सक्सेना कमेटी के अनुसार कैलोरी के आधार पर देश में 50 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे है और असंगठित क्षेत्र के लिए गठित अर्जुन सेन गुप्ता की रिपोर्ट के अनुसार देश के 77 प्रतिशत लोग 20 रूपए प्रतिदिन पर जीविका जीते है। तेंदुलकर कमेटी के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे जीने वालों की संख्या 37.2 प्रतिशत है। सरकार साफ-साफ यह बताए कि आखिर इस देश में गरीबों की संख्या कितनी हैं ? वहीं योजना आयोग ने अपनी 2005 की रिपोर्ट में बीपीएल जनसंख्या को 31 करोड़ बताया था। तेंदुलकर समिति ने दिसम्बर, 2009 में इसे 42 करोड़ बताया फिर भी सरकार दावा कर रही है कि गरीबी घटी है। ग्रामीण भारत के 42 करोड़ लोग अभी भी गरीबी रेखा के नीचे हैं और सरकार उनको खाद्यान्न देने में असमर्थ रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार 2005 में बीपीएल परिवारों की संख्या इस देश में लगभग 28 करोड़ थी जो कि बढ़कर करीब 41 करोड़ हो गई है। इन लोगों की आमदनी लगभग 20 रूपए प्रतिदिन से भी कम है। इसके लिए कांग्रेस की जन-विरोधी नीतियां जिम्मेदार है। ऊपर से बेलगाम बढ़ती महंगाई ने इन परिवारों के बच्चों के मुंह का निवाला छीन लिया है।
 
इस सप्ताह खाद्य मुद्रा स्फीति की दर 12.92 फीसदी दर्ज की गई है, जिसे गत सप्ताह की तुलना में 4 फीसदी की कमी के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। लेकिन, योजना आयोग के प्रधान सलाहकार प्रणव सेन ने इस बात का खुलासा करते हुए कहा है कि खाद्य वस्तुओं की मुद्रा स्फीति में तेज गिरावट की मुख्य वजह बीते साल की इसी अवधि में खाद्य मुद्रा स्फीति का आधार ऊंचा होना है। वास्तव में ज्यादातर खाद्य वस्तुएं महंगी बनी हुई हैं। यहां यह भी ध्यान रखने योग्य है कि हाल ही में डीज़ल की कीमतों में की गई बढ़ोतरी का असर आगामी सप्ताह में खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर देखने को मिलेगा, जिससे महंगाई और अधिक बढ़ेगी।
 
पेट्रोल और डीज़ल के दामों में इस सरकार द्वारा की गई बढ़ोतरी को सही ठहराते हुए माननीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जो बयान दिया है वह बयान इस सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। आम जनता में घोर निराशा है। भाजपा उनके इस संवेदनहीन बयान की भर्त्सना करती है।
 
हम सरकार से यह पूछना चाहते है कि :
  • क्या प्रधानमंत्री को केवल ऑयल कंपनियों की खस्ता हालत दिखती है और जनता की खस्ता हालत नहीं दिखती?
  • सरकार बताए की उनकी प्राथमिकता क्या है ? आम आदमी या ऑयल कंपनी ?
  • सरकार यह बताए कि दो साल से लगातार वादे करने के बावजूद वह महंगाई को क्यों नहीं रोक पाई ?
  • क्या सरकार को पता है खाद्यान्न कीमतों का सूचकांक जहां नरमी के संकेत दे रहा है वहीं बाजार में आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ रहे हैं ?
  • महंगाई कम करने के लिए यूपीए सरकार कौन-सा सफल और कारगर कदम उठाया है ?
  • श्रीमती सोनिया गांधी बताए कि एक अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री महंगाई रोकने में नाकाम क्यों हो रहे हैं
  • श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी महंगाई के मुद्दे पर क्यों चुप है देश जानना चाहता है ?

    (श्याम जाजू)
        मुख्यालय प्रभारी

Courtesy : www.bjp.org

श्री लालकृष्ण जी आडवाणी द्वारा भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक, पटना (बिहार) में दिए गए भाषण के मुख्य बिन्दु

यह एक संयोग है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितीन गडकरी द्वारा गठित नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पहली बैठक 12 व 13 जून की तय की गई। लेकिन कल ज्यों ही मैंने अपना साप्ताहिक ब्लॉग लिखना शुरू किया तो स्वतंत्र भारत के राजनीतिक इतिहास में 12 जून के महत्व का मुझे स्मरण हो आया (ब्लॉग की प्रति संलग्न)।

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पटना में हमारी बैठक में हुआ विचार-विमर्ष पूर्णतया संतोषजनक रहा। एजेन्डे के दो मुख्य बिन्दु थे :


तीन प्रस्ताव : एक - माओवादी गतिविधियों का विस्तार और दूसरा - यू.पी.ए.-II : निराशा और असफलता का एक वर्ष और तीसरा - भारतीय संघ के संघीय ढांचे पर केन्द्र के हमले संबंधी प्रस्ताव।

तीन प्रतिवेदन : (एक) पार्टी समिति की भारत-तिब्बत सीमा पर हुए अतिक्रमणों पर प्रारम्भिक रिपोर्ट। (दूसरा) - आजीवन सहयोग निधि के बारे में प्रतिवेदन और ( तीसरा ) सुराज संकल्प।

मैं समझता हूं कि इन सभी दस्तावेजों में से भारतीय संघ के संघीय ढांचे पर केन्द्र के हमले वाला प्रस्ताव और भारत-तिब्बत सीमा पर गई समिति का प्रतिवेदन सर्वाधिक महत्व का और उत्साहवर्धक रहा। कल शाम को जब हमारे दोनों संसद सदस्य श्री भगत सिंह कोशियारी और श्री राजीव प्रताप रूढ़ी ये प्रतिवेदन प्रस्तुत कर रहे थे, उस समय मैं सभागार में उपस्थित सदस्यों के चेहरों पर जिस गर्व की अनुभूति देख रहा था वह बहुत प्रसन्न करने वाली थी।

19 हजार फीट तक की ऊँचाई पर गये हमारे ये सांसद ऐसा कार्य कर पाये जो कोई और सांसद या राजनीतिक कार्यकर्ता आज तक नहीं कर पाया और जिस प्रकार के चित्र उन्होंने कार्यसमिति के सामने प्रस्तुत किये वह इस बात को स्पष्ट दर्शाते थे कि जहाँ भारत-तिब्बत सीमा के निकट चीन सड़कें, हवाई अड्डे आदि बनाने में बहुत सक्रिय है, वहीं भारत की सीमा के भीतर पूर्ण निष्क्रियता है।

सन् 2008 में मैंने जब अपनी आत्मकथा लिखी थी तो स्वाभाविक रूप से स्वतंत्र भारत में लोकतंत्र का, भारतीय राजनीति का जिस प्रकार से विकास हुआ है, उसका भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के परिप्रेक्ष्य में वर्णन किया था। पुस्तक समाप्ति के बाद व्यक्तिगत रूप से मुझे संतोष हुआ था, लेकिन यह अनुभूति भी हुई कि डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, श्री नानाजी देशमुख और श्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दिग्गज नेताओं द्वारा पुष्पित और पल्लवित भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी का एक विस्तृत इतिहास भी लिखा जाना चाहिए।

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मेरा जन्म 1927 में करांची (सिंध) में हुआ। जीवन के प्रथम 20 वर्ष मैंने सिंध में बिताए। मैं 1942 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक सिंध में ही बना। 1947 मे मैं राजस्थान आया और 1957 तक वहीं रहा। 1957 के बाद ही मेरी गतिविधि का केन्द्र दिल्ली बना। राजनीति में 1951 से जनसंघ के जन्मकाल से मैं सक्रिय रहा हूं। 1952 के प्रथम आम चुनाव से 2009 के पंद्रहवें आम चुनाव तक मैंने सभी प्रत्यक्ष देखे हैं।

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राजस्थान में रहते हुए मुझे इस बात की गहरी अनुभूति हुई कि अगर स्वतंत्र भारत के नेतृत्व में सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे दूरदर्शी और दृढ़ निश्चयी नेता न होते तो इस बात की पूरी सम्भावना रहती कि स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ-साथ भारत का केवल विभाजन ही नहीं होता, संभवत: विघटन ही हो जाता।

अगस्त 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ। पं. जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री बने व सरदार पटेल उप-प्रधानमंत्री। शासन के सामने सबसे बड़ा कार्य था भारत भर में फैले लगभग 530 रजवाड़ों का देश के साथ एकीकरण। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सरदार पटेल को यह कार्य करना था और उन्हें इसके लिए थोड़ा ही समय मिला। दिसम्बर 1950 में उनका देहान्त हो गया।

सरकार में उनके साथ एक बहुत ही श्रेष्ठ अधिकारी रहे श्री वी.पी.मेनन । श्री मेनन ने दो उत्तम ग्रंथ लिखे हैं :- एक - The Story of Transfer of Power व दूसरा : The Integration of Indian States ये दो ग्रंथ सरदार वल्लभभाई पटेल की अद्भुत प्रशासनिक क्षमता, असाधारण देशभक्ति तथा दूरदर्शिता के परिचायक हैं।

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पीछे मुड़कर देखने पर मैं यह कह सकता हूं कि अगर भारतीय जनसंघ न बना होता और डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का श्रीनगर के कारावास में बलिदान नहीं हुआ होता तो आज स्थिति ये रहती कि जम्मू कश्मीर में तिरंगा नहीं लहराया जाता, और वैष्णो देवी की यात्रा करने के इच्छुक लोग बिना परमिट के वहाँ नहीं जा सकते थे।

इतना ही नहीं वर्ष 1975-76 के इमरजेंसी काल का स्मरण करके मैं कह सकता हूँ कि अधिनायकवाद के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी और पूरे संघ परिवार ने जो जबरदस्त संघर्ष किया और जिसका सुखद परिणाम 1977 के चुनाव परिणामों में प्रकट हुआ, यदि यह न हुआ होता तो आज भारतीय राजनीति का चेहरा ही कुछ दूसरा होता। उन दिनों इमरजेंसी काल में कांग्रेसी मुखपत्र National Hearld ने इसकी लगातार वकालत की थी कि हिन्दुस्तान को बहुदलीय लोकतंत्र नहीं, अपितु अफ्रीका के कुछ देशों की तरह का एकदलीय लोकतंत्र चाहिए।

आज दुनिया भर में भारत की जो इज्जत है उसका कारण न केवल यह है कि भारत एक उदीयमान आर्थिक महाशक्ति माना जाता है वरन् यह भी है कि भारत एकमात्र विकासशील देश है जो कि इमरजेंसी के 20 महीने छोड़कर एक सफल लोकतंत्र सिध्द हुआ है।

1962 में भारत की चीन के हाथों एक अपमानजनक परायज हुई। चीन का वह आक्रमण प्रधानमंत्री पं. नेहरू के लिए जानलेवा साबित हुआ। मैं एक पत्रकार के नाते दिसम्बर 1962 में पहली बार लद्दाख गया और तीव्र अहसास हुआ कि कांग्रेस शासन देश की सुरक्षा के प्रति कितना उदासीन है।

1964 में चीन ने लोपनोर में अणु विस्फोट कर आणविक शक्ति बनने की ओर पहला कदम उठाया।

उसके तुरन्त बाद जनसंघ ने प्रस्ताव किया कि भारत को अणु बम बनाने की ओर बढ़ना चाहिए। बाकी सब हमारी आलोचना करते रहे किन्तु देश की प्रतिरक्षा को सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानने वाला हमारा दल अपने लक्ष्य से कभी विचलित नहीं हुआ।

1998 में हमें अवसर मिला। घोषणा पत्र तैयार करते हुए हमने एन.डी.ए. के सहयोगी दलों को भाजपा के इस कार्यक्रम से सहमत कराया। मार्च में श्री वाजपेयी का मंत्रिमण्डल बना और मई में पोखरण हुआ। एक-एक भारतीय, भारत के भीतर और भारत के बाहर गौरव का अनुभव कर पाया।

भारतीय जनता पार्टी के एक-एक सदस्य को इस बात का गर्व होना चाहिए कि भारत की अखण्डता को बरकरार रखने में और भारत के लोकतंत्र को अक्षुण्ण बनाये रखने में और भारत को एक आणविक शक्ति बनाने में भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी की अद्वितीय भूमिका रही है।

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जब मैं पिछले छ: दशकों की राजनीतिक यात्रा पर नजर दौड़ाता हूँ तो मुझे इस पर निराशा होती है कि 1947 में जो आकांक्षाएं और सपने हमने देखे थे, वे पूरे नहीं हुए हैं। प्रत्येक वर्ष जब मैं दो रिपोर्टों को देखता हूँ तो मुझे अत्यधिक दु:ख पहुँचता है; ट्रांसपेरेसी इंटरनेशनल की वार्षिक रिपोर्ट जो भ्रष्टाचार के आधार पर तैयार सूचकांक में देशों की स्थिति दर्ज करती है, इस रिपोर्ट में भारत हमेशा ऊपरी स्थान पर रहता है। और संयुक्त राष्ट्र संघ की मानव विकास रिपोर्ट जिसमें भारत का स्थान अत्यधिक नीचे वाले देशों में रहता है।

1997 में जब भारत की आजादी के 50 साल पूरे हुए तब मैंने अपने जीवन की सबसे लम्बी यात्रा की थी। पार्टी ने इसे ''स्वर्ण जयंती रथ यात्रा'' का नाम दिया था।

59 दिनों में सम्पूर्ण देश का दौरा करके उन सभी देशभक्तों को पार्टी की ओर से श्रध्दा-सुमन अर्पित किये थे जिनके त्याग, तपस्या और बलिदान से भारत को 1947 में आजादी मिली थी।

पार्टी ने देश को यह भी संदेश दिया था कि यदि 50 साल बीत जाने के बाद देश अभी भी पिछड़ा हुआ है, और अपनी सम्भावनाओं के अनुरूप विश्व में स्थान प्राप्त नहीं कर पाया है तो उसका कारण है कि देशभक्तों की कुर्बानियों के कारण स्वराज तो मिला, लेकिन जिन लोगों ने शासन सम्भाला था वे उसे सुराज नहीं बना पाये। भारतीय जनता पार्टी का देश को वचन है कि जहाँ-जहाँ पर हमें सरकार चलाने का अवसर मिलेगा वहाँ-वहाँ हम उसे सुराज बनाकर दिखायेंगे।

1997 में दिये गये इस वचन को 1998 मे हीं हमें केन्द्र में पूरा करने का अवसर मिला। 6 साल तक श्री वाजपेयी के नेतृत्व में एन.डी.ए. की एक शानदार सरकार चली।

आज अनेक प्रदेशों में भी हमारी जो सरकारें चल रही हैं वे भी इस वचन की पूर्ति में ईमानदारी से लगी हुई हैं; और इस प्रकार भारतीय राजनीति में भारतीय जनता पार्टी जो भूमिका निभा रही है वह हमारे कार्यकर्ताओं की ताकत का चिरंतन स्रोत है और जनता में हमारे लिए बढ़ती हुई सद्भावना व साख का अमूल्य सोपान भी।

Courtesy : www.bjp.org